Monday, March 2, 2020

Panchatantra Stories in Sanskrit for kids

Panchatantra Stories in Sanskrit for kids


Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
(Panchatantra Stories With Pictures and Morals In Hindi)


Panchatantra Stories In Sanskrit With Morals:-

Panchatantra is an ancient Indian collection of various mythological stories related to kids, animals, philosophy, philanthropy, and the most important moral values. These stories have been very popular among people for a long time. Kids read these stories with great interest. Panchatantra stories provide moral values and lessons to the readers. Even adults have a huge interest in reading stories like Panchatantra Stories.


Panchatantra Stories In Sanskrit For Kids 

The Indian epic Panchatantra was written by “Vishnu Sharma”. These ancient interesting stories which are written by "Vishnu Sharma" have spread across all the parts of the world and have been translated into various languages like- Sanskrit, Tamil, English, Telugu, Malayalam, etc.

Here, we have gathered some very famous Panchatantra stories in Sanskrit For Kids with Hindi translation. You can read them in all languages.



We are writing two Panchatantra Stories with pictures and morals in Hindi here ⬇️



  • Billi Ka Nyaay Shanaya's Collections
  • Chuhiya Bani Dulhan Shanaya's Collections

1. BILLI KA NYAAY  

Panchatantra Stories in Sanskrit for kids

Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
(Panchatantra stories in Sanskrit for kids) 



एक समय की बात है। एक घने जंगल के एक बड़े से पेड़ के खोल के अंदर एक तीतर ने अपना घोसला बना रखा था। तीतर दाना चुग कर अपना पेट भरता था। दाना चुगने के लिए वो अलग-अलग गांव में जा कर दाना चुगता। एक दिन तीतर अपने साथियो के साथ एक खेत में दाना चुगने चला गया। वहाँ उसे बहुत रात हो गयी। तभी तीतर के एक साथी ने उससे कहाँ:- 

दूसरा तीतर:-  क्या तुम्हे नहीं लगता है कि आज हमे अपने घर जाने के बजाय यही इस खेत में ही रुक जाना चाहिए। 

तीसरा तीतर:- हां, हां, तुम सही कह रहे हो बिलकुल। हमे ऐसा ही करना चाहिए। इतनी रात को हम कहाँ जायेंगे। रात तो बहुत हो चुकी है। हमे यही विश्राम करना चाहिए। जंगल में हम कल सुबह चल पड़ेंगे। 


उस साथी के कहते ही वहाँ खेत में ही अपनी रात गुज़ारने को तैयार हो जाते है और इधर एक तीतर के घोसले के पास से खरगोश निकलता है और सोचता है:- 

खरगोश:- अरे, यहाँ इतनी रात में कोई नज़र नहीं आ रहा है। लगता है इस घोसले में कोई नहीं रहता। क्यों ना मैं अपनी रात इसी घोसले में गुज़ार लू। 


और फिर खरगोश भी वह पर अपनी रात गुज़ार लेता है। अगले ही दिन सुबह उठ कर खरगोश देखता है कि वहा सुबह भी कोई नहीं आता है। दूसरी तरफ तीतर और उसके साथी उस खेत के पास ही कुछ दिनों तक और रहने का फैसला करते है। 


Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
Panchatantra Stories in Sanskrit for kids


जब ज़्यादा दिन हो जाते है तब तीतर एक दूसरे से कहते है कि हमे अब अपने घर की तरफ चलना चाहिए। सभी अपने-अपने घर की तरफ चले जाते है। सारे तीतर अपने-अपने घोसले में वापिस चले जाते है। लेकिन बड़े पेड़ का तीतर जब अपने घोसले में आता है तो उसे खरगोश दिखाई देता है और वो उससे पूछता है:-

तीतर:- अरे, ये क्या ?  तुम यहाँ कैसे आये हो ? ये घोसला तो मेरा है। चलो जाओ यहाँ से। 

खरगोश:- ये घोसला तुम्हारा कैसे हो सकता है ? इतने दिन से ये घोसला खाली पड़ा था। तब तुम कहाँ थे ? बड़े आये इस घोसले को अपना बताने वाले। जाओ यह से। ये घोसला अब मेरा है। 

कहते हुए खरगोश तीतर की तरफ गुस्से से देखता है। तीतर थोड़ा डर जाता है और फिर उससे कहता है। 

तीतर:- तुम कौन होते हो मुझे बाहर निकलने वाले। ये घोसला मेरा है। इस घोसले का मालिक मैं हुँ। तुम नहीं, इसलिए तुम ये घोसला जल्दी से खाली कर दो। 

खरगोश:- अरे, ऐसे कैसे खाली कर दू ? ये घोसला अब मेरा है। इतने दिन तक तो तुम नहीं आये। अब ऐसे अचानक से अपना हक़ कैसे जता सकते हो। अब ये घर मेरा है। 

दोनों में बहस बढ़ती गयी और ये सब नज़ारा एक चालाक बिल्ली देख रही थी और सोचने लगी:- 

बिल्ली:- म्याऊ, म्याऊ। क्यों ना मैं इन दोनों को अपनी चालाकी से इनका बीच-बचाओ करने के बहाने इनके पास जाऊ और इन्हे अपना शिकार बनाऊ। म्याऊ, एक तरफ खरगोश और एक तरफ ये तीतर। कितना मज़ा आएगा इनका शिकार करके। म्याऊ, म्याऊ। 


Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
Panchatantra Stories in Sanskrit for kids


ये सोचते ही बिल्ली उनके घोसले के पास जा कर साधू का भेस बना कर एक पेड़ के नीचे बैठ जाती है। उधर खरगोश और तीतर किसी तीसरे को बिच में लाने का फैसला करते है। 

खरगोश:- चलो, ना तुम्हारी मानते है और ना ही मेरी। ये घोसला किसका है ये किसी तीसरे को ही बिच में ला कर इसका फैसला करते है। 


तीतर भी खरगोश की इस बात से सहमत होता है और वो दोनों एक-दूसरे के साथ चलने लगते है। उन्हें अपने घोसले के सामने ही वो बिल्ली जो साधू का भेष बना कर बैठी हुई थी नज़र आती है। उसे देख कर तीतर कहता है:-

तीतर:- ये कोई पहुँचे हुए महात्मा लगते है जो इस जंगल में तप कर रहे है। क्यों ना इनसे ही अपना फैसला करवा ले। 

खरगोश:- इस जंगल में इतने  दिनों तक तो कोई महात्मा नज़र नहीं आया तो ये कहाँ से आ गया। 

तीतर:- तुम्हे तो हर किसी पर शक होता है। ये पहुँचे हुए महात्मा लगते है। इन्ही से फैसला करवाते है कि ये घोसला किसका है। अभी ही दूध-का-दूध और पानी-का-पानी हो जायेगा। 


खरगोश भी तैयार हो जाता है और फिर वो दोनों बिल्ली के पास चले जाते है। उन दोनों की सारी बाते वो जंगली बिल्ली सुन रही थी। उसे बड़ी ख़ुशी हुई ये जान कर कि खरगोश और तीतर उससे ही अपना फैसला करवाने उसके पास आ रहे है। 



Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
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तीतर और खरगोश बिल्ली के पास जा कर उसे अपनी व्यथा सुनाते है। 

बिल्ली:- तुम्हारी बाते सुनकर लगता है कि तुम दोनों ही बहुत परेशान हो। तुम्हे अपने सुख और दुःख साथ बाटने चाहिए। इसलिए मैं तुम्हे अपना फैसला सुनाना चाहता हुँ। तुम मेरे पास आओ। आओ, आओ, पास आओ। और पास आओ। 


ये सुनते ही तीतर और खरगोश एक-दूसरे के साथ मिल कर उस बिल्ली के पास चले जाते है। जैसे ही वो उसके पास जाते है बिल्ली उनपे झपट्टा मार कर उन्हें खा जाती है। 



कहानी की सीख़:- हमे बिना सोचे-समझे किसी से भी सलाह नहीं लेनी चाहिए। 

Moral Of This Panchatantra Story In Hindi:- We should not take advice from anyone without thinking.






2. CHUHIYA BANI DULHAN 

Panchatantra Stories in Sanskrit for kids


Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
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बहुत समय पहले की बात है। गंगा नदी के तट पर एक महात्मा और उनकी पत्नी रहते थे। महात्मा और उनकी पत्नी को एक दुःख बहुत सता रहा था कि उनकी कोई भी संतान नहीं थी। इस दुःख के साथ वह अपनी ज़िंदगी काट रहे थे। 

पत्नी:- प्रभु, हमसे ना जाने कोनसे पाप हुए है कि भाग्य ने हमारे नसीब में कोई संतान नहीं दी है। 

महात्मा:- धैर्य रखो देवी। ईश्वर जो भी करेगा अच्छा ही करेगा। तुम किसी भी प्रकार का दुःख अपने मन में मत पालो। सब अच्छा होगा। 


महात्मा पत्नी को गले लगा कर उसे शांत करने की कोशिश करता है। फिर एक दिन महात्मा जब गंगा के तट पर ध्यान-अवस्था में बैठे हुए थे तभी एक बाज़ उनके ऊपर से गुज़रा। बाज़ के पंजे में एक चुहिया फसी हुई थी। जब बाज़ महात्मा के ऊपर से गुज़र रहा था तब अचानक से बाज़ के पंजो से चुहिया छूट कर महात्मा की गोद में गिर जाती है। 


Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
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घायल चुहिया को देख कर महात्मा को बहुत दया आती है। अचानक साधु के मन में एक विचार आता है। वो तुरंत मंत्र पढ़ कर चुहिया को एक नवजात बच्ची के रूप में बदल देते है और उस बच्ची को अपनी पत्नी को देते हुए बोलते है:-

महात्मा:- प्रिय हमारी कोई संतान नहीं है। मैं जानता हुँ कि तुम संतान सुख चाहती हो। इस बच्ची को अपना लो। आज से यह हमारी संतान है। 

महात्मा की पत्नी उस बच्ची को पा कर बहुत खुश हुई। मानो उसे इस जहान की सारी खुशियाँ मिल गयी हो। उन्होंने बच्ची को बड़े ही प्यार से अपने हाथो में लिया और बड़े प्रेम से चूमने लगी। अब महात्मा और उनकी पत्नी दोनों मिलकर बड़े ही नाज़ो से बच्ची को पालने लगे। 

इसी तरह कई साल बीत गए। वो छोटी-सी बच्ची अब सुन्दर-सी लड़की बन गयी थी। अब महात्मा अपने बेटी के लिए उपयुक्त वर ढूंढ़ने लगे। महात्मा अपनी बेटी का हाथ किसी साधारण व्यक्ति के हाथ में नहीं देना चाहते थे। महात्मा ने सूर्य देव का ध्यान कर के उन्हें बुलाया। अगले ही पल सूर्य देव वहां प्रकट हो गए। 

महात्मा:- बेटी, यह सूर्य देव है। क्या तुम इनसे विवाह करोगी ?

बेटी:- नहीं, पिता जी। ये बहुत गरम है। इनके साथ तो मेरा रहना मुश्किल हो जाएगा। 



Panchatantra Stories in Sanskrit for kids
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फिर महात्मा ने वरुण देव को बुलाया। 

महात्मा:- बेटी, यह वरुण देव है। क्या तुम इसके साथ विवाह करोगी ?

बेटी:- नहीं, नहीं, पिता जी। इनसे भी मैं विवाह नहीं कर पाऊँगी। ये बहुत ही सावले और ठंडे है। 

बेटी की यह बात सुन कर वरुण देव महात्मा जी को पवन देव को बुलाने की सलाह देते है और मुस्कुराते हुए वहां से चले जाते है। फिर महात्मा जी पवन देव का ध्यान करते है और तुरंत वहां पवन देव प्रकट हो जाते है। 

महात्मा:- बेटी, क्या तुम पवन देव से शादी करोगी ?

बेटी:- नहीं, पिता जी। यह तो हमेशा ही चलते रहते है। कभी भी स्थिर नहीं रहते है। इनसे भी मैं विवाह नहीं करूंगी। 

महात्मा की बेटी की यह बात सुन कर पवन देव भी हस कर बोलते है कि महात्मा जी आप पर्वत राज के पास जाइये। वह बहुत ही शक्तिशाली है और स्थिर भी रहते है। उनमे तो असीम शक्ति है। यहां तक कि वो मुझे भी रोक देते है। वह आपकी बेटी को ज़रूर पसंद करेंगे। यह कह कर वो वहां से चले जाते है। 

महात्मा जी को पवन देव की सलाह बहुत अच्छी लगती है। वो अपनी बेटी को ले कर पर्वत राज के पास जाते है लेकिन वहां जा कर महात्मा की सारी मेहन्त बेकार हो जाती है क्योंकि महात्मा की बेटी पर्वत राज को देखते ही बोल पड़ती है:-

बेटी:- पिता जी, यह बहुत कठोर है। मैं इनसे विवाह नहीं करूंगी। इन्हे तो छूना भी मुश्किल है। 


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बेटी की यह बात सुन कर महात्मा पर्वत राज से बोले:-

महात्मा:- पर्वत राज जी, क्या आप मुझे बताएंगे कि आपसे भी शक्तिशाली कौन है ?

पर्वत राज:- महात्मा जी, यदि आप मुझसे भी शक्तिशाली व्यक्ति के बारे में जानना चाहते है तो वह चूहा है। आप चूहे के पास जाइये। वो इतना शक्तिशाली है कि वह मेरी मज़बूत शिलाओं में भी अपना बिल बना लेता है। 


पर्वत राज की बात सुनते ही महात्मा जी तुरंत चूहे को बुलाते है। चूहे को देख कर महात्मा की बेटी एकदम खुश हो जाती है और अपने पिता से बोलती है:- 

बेटी:- पिता जी। अब आपको परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है। मैंने इस चूहे को अपने पति के रूप में चुन लिया है। लेकिन इसके लिए आपको मुझे चुहिया बनाना पड़ेगा। 


अपनी बेटी की यह बात सुन कर महात्मा जी मुस्कुराते है और तुरंत अपने मन्त्र के प्रभाव से उस लड़की को चुहिया बना देते है और फिर चूहे और चुहिया का विवाह कर देते है और इस तरह एक चुहिया बनी दुल्हन। वो दोनों ख़ुशी से अपनी ज़िंदगी जीने लगते है। 


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कहानी की सीख:- किसी की पहचान बदली नहीं जा सकती है। 

Moral Of This Panchatantra Story In Hindi:- We can not change the identity of anyone. 


आप इन सभी कहानियों को सभी भाषाओं में पढ़ सकते हैं। हम अपनी वेबसाइट में एक अनुवाद बटन रखते हैं ताकि आप सभी भाषाओं में सभी कहानियाँ पढ़ सकें।
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