Tuesday, March 17, 2020

Panchatantra Stories In Hindi PDF

Panchatantra Stories In Hindi PDF

 

Hello,
Today we are really excited to write Panchatantra Stories In Hindi PDF. These Hindi Stories For Kids Panchatantra PDF can assist you in your whole life. 

These Panchatantra Stories In Hindi With Moral PDF is for all who love to read Panchatantra Moral Stories In Hindi PDF.
Have Fun!

Panchatantra Stories In Hindi PDF

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नमस्कार,
आज हम पंचतंत्र स्टोरीज इन हिंदी पीडीऍफ़ लिख रहे हैं। ये पंचतंत्र स्टोरीज इन हिंदी विथ मोरल पीडीऍफ़ आपको अपने जीवन में मदद करेगी। ये पंचतंत्र स्टोरीज इन हिंदी विथ मोरल सभी के लिए हैं। 

कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एक बच्चे, या बड़े, या माता-पिता या शिक्षक हैं। जिनको भी पंचतंत्र स्टोरीज पढ़नी अच्छी लगती है वो सब इसे पढ़ सकते है।
मज़े करो!



So, Let's Read Panchatantra Stories In Hindi PDF. ⬇️


  • Magical Tree - जादुई पेड़ 
  • Potted Pot - फूटा घड़ा 





1. Magical Tree - जादुई पेड़ 

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Panchatantra Stories In Hindi PDF
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एक गांव में सोमराज नाम का एक ज़मींदार रहता था। उसने घर का और बाग़ का काम करने के लिए राजू नाम के व्यक्ति को काम पर रखा हुआ था। सोमराज बहुत कठोर हृदय वाला बड़ा ही दयाहीन इंसान था। एक दिन राजू काम पर देर से आता है तो सोमराज उससे कहता है:-

सोमराज:- क्या रे, अब आया है काम पर। इस तरह देर से आएगा तो काम कौन करेगा 

राजू:- गलती होगयी बाबू जी। अब से ऐसा नहीं करूंगा। 

सोमराज:- पहले कारण बता मुझे। 

राजू:- वो क्या है सेठ जी कि मेरे लड़के को बुखार हो तो उसको डॉक्टर के पास ले कर जाना था इसलिए मैं देरी से आया हूँ। 

सोमराज:- तुम्हे ही ले कर जाना था क्या ? तुम्हारी पत्नी नहीं थी क्या घर पर

राजू:- उसको भी बुखार आया था बाबू जीइसलिए वो नहीं जा सकती थी। 

सोमराज:- ठीक है, ठीक है। चलो अब काम पे लग जाओ। अगर कल से देर से आये तो काम पर ही मत आना। 

राजू:- ठीक है बाबू जी। आज के बाद देर से नहीं आऊंगा। समय से पोधो को पानी लगाऊंगा। 

सोमराज:- यहाँ मनुष्यो के लिए पीने को पानी नहीं है और तू उन पेड़-पोधो को पानी डालेगा। कोई ज़रूरत नहीं है आज पानी डालने की। कल पानी डालना। आज पूरा घर साफ़ करो। आँगन में जादू लगाओ। चलो। 

राजू:- पेड़ों की वजह से ही तो हम ज़िंदा है। बाकी ठीक है जी। 


कहते हुए राजू काम करने लग जाता है। काम पूरा करने तक शाम हो जाती है। फिर वो ज़मींदार से कहता है:-

राजू:- बाबू जी। मैं घर चलता हूँ। सारा काम खत्म हो गया। 

सोमराज:- क्या रे, अभी जाएगा। सुबह देर से आएगा और शाम को जल्दी जायेगा। ऐसा क्यों है रे। 

राजू:- वो बाबू जी। मेरी पत्नी और बच्चा दोनों बीमार है इसलिए उन्हें संभालने के लिए मुझे जाना ही होगा। 


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सोमराज:- उन्हें कुछ नहीं होगा। मेरे सर में भी बहुत दर्द हो रहा है। जाओ जंगल में जाओ और एक जड़ी-बूटी ले कर आओ। जाओ। 

राजू:- अभी तो बाहर बहुत अँधेरा है बाबू जी। मैं कैसे जाऊ ?

सोमराज:- क्यों रे। मुझे ही उल्टा जवाब दे रहा है क्या ? जो बोला है वो कर। 

राजू:- मैं अकेला बाबू जी। डर लग रहा है। 

सोमराज:- जो बोला है वो करो और तुम्हे ही जाना पड़ेगा। समझे ? वो जड़ी-बूटी रात को ही काम करती है। अभी जल्दी जाओ। 

राजू:- ठीक है बाबू जी। 


कहते हुए राजू जंगल के लिए निकल पड़ता है। अँधेरा होने के कारण जंगल में कुछ भी साफ़-साफ़ नहीं दिखाई दे रहा था। जिधर देखो सिर्फ अँधेरा ही अँधेरा दिखाई दे रहा था। तभी उसे बाग़ की दहाड़ सुनाई देती है। वो उलटे पैर वापिस भागने लगता है। तभी उसकी एक पेड़ से टक्कर होती है और वो नीचे गिर पड़ता है। 

वो जब सुबह उठता है तो उसके आस-पास सोने की मोहरे ही मोहरे होती है। 

राजू:- अरे, इस पेड़ के नीचे मोहरे कैसे आयी ? क्या हुआ ?


अभी वो सोच ही रहा होता है कि पेड़ बोल उठता है:- 

पेड़:- राजू, ये सोने की मोहरे मैंने तुम्हारे लिए ही दी है। तुम्हारी भलाई मुझे बहुत अच्छी लगी। अब तुम्हे किसी के पास जा कर काम करने की ज़रूरत नहीं है। 


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राजू:- काम नहीं करना है क्या ?

पेड़:- तुम्हे सिर्फ ये काम करना है कि हर रोज़ कर मुझे पानी देना है। अगर तुम मुझे हर रोज़ पानी दोगे तो मैं भी तुम्हे हर रोज़ सोने की मोहरे दूंगा। 

राजू:- ठीक है।  मैं तुम्हे हर रोज़ पानी डालूंगा और तुम्हारे साथ-साथ दूसरे पेड़ो को भी डालूंगा। 

पेड़:- ठीक है राजू। मुझे बहुत ख़ुशी हुई। अब जाओ। कल फिर आना। 


उसके बाद राजू सोने की मोहरो की थैली को उठा कर सोमराज के घर के लिए निकल पड़ता है और सोचता है:-

राजू:- अरे, वो जादुई पेड़ है और सोने की मोहरे देता है। ये सब मैं अपने मालिक को दे दूंगा। फिर वो मुझे इस में से कुछ ना कुछ ज़रूर देंगे। 

सोमराज:- क्या रे, तुझे कल रात को भेजा था जंगल में। मैं पूरी रात तुम्हारा इंतज़ार करता रहा और तुम आये ही नहीं। अब बाहर ही रहो। जाओ, भाग जाओ यह से। अंदर मत आना। 

राजू:- वो नहीं बाबू जी। 

सोमराज:- क्या नहीं बाबू जी। अब तुम्हे काम पर आने की ज़रूरत नहीं है। चलो , भाग जाओ यहाँ से। 


कहते ही राजू उस होने की मोहरो की थैली पकड़कर घर चला जाता है। तब उसकी पत्नी राधा कहती है:-

राधा:- इस थैली में क्या है जी ? आप तो कभी ऐसी थैली ले कर नहीं आये। 


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फिर राजू अपनी पत्नी को सारी बात बताता है और फिर राधा कहती है:-

राधा:- हम कितने भाग्यवान है। अब हमारे सारे कष्ट मिट जायेंगे। 


फिर रामु जंगल जा जा कर उस पेड़ को पानी डालता है तुरंत वो पेड़ उसे सोने की मोहरे देने लगता है। उसके बाद वो एक बैग पूरा भर लेता है मोहरो का। 

कुछ ही दिनों में राजू एक बड़ा घर बना लेता है। गांव में सबसे धनवान बन जाता है। गांव के सभी लोगो की सहायता भी करता है। वो गाओं में सब के घरों में जा कर पौधा लगाता है और उसकी रखवाली भी करता है। 

इसके बाद सब लोग राजू की प्रशंसा करते है। सोमराज को भी उसके धनवान होने का पता चलता है। 

सोमराज:- अरे, राजू इतना धनवान कैसे बन गया ? उसके पास इतने पैसे कहाँ से आये ? वो इतने पैसे कहाँ से लाता है कल मैं ज़रूर देखूंगा। 


उसके बाद अगले दिन जब राजू उस पेड़ को पानी डाल रहा होता है तो पीछे से सोमराज भी जाता है। वो देखता है कि किस तरह पेड़ राजू को सोने की मोहरे दे रहा है। 

राजू जब सोने की मोहरे उठा कर जाने लगता है तो सोमराज उसके सामने आता है और कहता है:-

सोमराज:- क्या रे, उस पेड़ को पानी डालने से सोने की मोहरे गिरती है। ये क्या रहस्य है ? मैं भी पानी डाल कर पेड़ के नीचे बैठूंगा। 


सोचते हुए वो भी पेड़ को बहुत सारा पानी डालता है और पेड़ के निचे ही बैठ जाता है। उसके बाद पेड़ से साँप गिरने लगते है। 


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इस वजह से सोमराज एकदम डर जाता है और भागने लगता है। साँप उसका पीछा करते है। सोमराज भागते-भागते  गड्ढे में गिर जाता है। तब पेड़ कहता है:-

पेड़:- अच्छे मन से सेवा करने वालो का ही भला होता है। जो गलत विचार ले कर आता है उसका बुरा ही होता है। 

शिक्षा:- अच्छे मन से सेवा करने वालो का ही भला होता है। जो गलत विचार ले कर आता है, उसका बुरा ही होता है।  

Moral:- It is good for those who serve with a good mind. The one who comes up with the wrong idea is bad.



2. Potted Pot - फूटा घड़ा  

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एक गांव में श्याम नाम का किसान था। उसका एक छोटा-सा खेत था। उसके पास दो घड़े थे। जिससे वो रोज़ अपने घर के लिए पानी ले कर आता था।


लेकिन उनमे से एक घड़ा फूट चूका था। नदी से पानी लाने पर जिसकी वजह से एक घड़ा भरा हुआ रहता था और दूसरा आधा ही भरा हुआ रहता था।


फूटा घड़ा बहुत शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर पहुँचा पाता है। सही घड़े को इस बात का बहुत घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुँचाता है। इसलिए वो फूटे घड़े को कहता है:-


घड़ा:- तू आधा पानी ला कर मालिक की मेहनत बेकार कर देता है।


ये सुनकर फूटा घड़ा बहुत दुखी होता है। दोनों घडो की बाते सुनकर श्याम फूटे घड़े को कहता है:-


श्याम:- तुम सिर्फ अपनी बुराई देख रहे हो। पर मैं शुरू से ही उस बुराई के साथ छिपी अच्छाई को भी देख रहा हूँ। इसलिए मुझे कभी भी तुम में कोई कमी दिखाई ही नहीं दी। तुम्हे ऐसा क्यों लगता है कि तुम मेरे किसी काम के नहीं हो। जाने अनजाने में तुमने मेरी बहुत मदद की है

फूटा घड़ा:- पर वो कैसे?

श्याम:- हर रोज़ जब हम नदी से वापिस आते है तो तुम्हारा आधा पानी उस ज़मीन पर गिरता है जिससे वहाँ फूलो को उगने में मदद मिलती है। तो तुम कैसे सोच सकते हो कि तुम मेरे किसी काम के ही नहीं हो।

फूटा घड़ा:- इन सब में आपकी मदद कैसे हुई?


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श्याम:- वो ऐसा है कि अब मैं खेती के साथ-साथ उन फूलो को भी बाजार में बेचने लगा हूँ। जिससे मेरे पास और अधिक धन आ जाता है। उस धन से मैं खेत के लिए ज़्यादा और अच्छे बीज खरीद लेता हूँ। ये सब तुम्हारी ही वजह से हो पाया है। इसलिए तुम आज के बाद अपने-आप को कभी कम मत समझना

शिक्षा:- हमे कभी भी किसी के हुनर का मज़ाक नहीं बनाना चाहिए, बल्कि उसकी अच्छाई को ढून्ढ कर उसे और निखारना चाहिए।

Moral:- We should never make fun of someone's skill, but instead, find his goodness and enhance it.



You can read this story in almost all languages like:-

  • Hindi 
  • English
  • Tamil
  • Kannada
  • Telugu 
  • Malayalam




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